प्रतिनिधि रचनाए – दिनकर सोनवलकर

पुस्तक – प्रतिनिधि रचनाए ( कविता संग्रह ) लेखक – दिनकर  सोनवलकर सम्पर्क – श्री प्रतीक सोनवलकर, सयुक्त आयुक्त (विकास) कमिश्नर कार्यालय उज्जैन  9425490735 प्रकाशक – अक्षर विन्यास, उज्जैन मूल्य – 100/-

रिश्तो के चक्रव्यूह – प्रतीक सोनवलकर

पुस्तक – रिश्तो के चक्रव्यूह ( कविता संग्रह ) लेखक – प्रतीक सोनवलकर सम्पर्क – सयुक्त  आयुक्त (विकास) कमिश्नर कार्यालय उज्जैन  9425490735 प्रकाशक – अक्षर विन्यास, उज्जैन मूल्य – 150/-

भावनाओ के शब्दांश – डॉ. पंकजा सोनवलकर

पुस्तक – भावनाओ के शब्दांश ( कविता संग्रह ) लेखक – डॉ. पंकजा सोनवलकर सम्पर्क – श्री प्रतीक सोनवलकर, सयुक्त आयुक्त (विकास) कमिश्नर कार्यालय उज्जैन  9425490735 प्रकाशक – अक्षर विन्यास, उज्जैन मूल्य – 120/-  

चालक लोमड़ी

चंदा सुदर वन की सबसे सुन्दर लोमड़ी थी वह जंगल के हर झगडे का फैसला इस होशियारी से करती थी कि जंगल के हर जानवर अपने झगड़े सुलझाने उडी के पास आते थे |उसी जंगल में अकडू एवं भेरू नाम के दो सियार भी रहते थे | चंदा उन्हें एक आँख नहीं भातिं थी , […]

चतुर किसान

एक किसान शलजम बोने जंगल में गया |वह हल चला रहा था | इतने में एक भालू आया और बोला –“किसान , मैं तेरी हड्डी फसली तोड़ डालूंगा |” “नहीं भालू भाई बजाय हड्डी तोड़ने के तुम शलजम बोने में मेरी मदद करो | उसकी जड़ें-जड़ें मैं ले लूँगा और पत्तें तुम ले लेना |” […]

बुद्धिमान राहगीर

एक दिन एक सौदागर अपने ऊँट पर सामन लाद कर शहर में बेचने चला | उसका ऊँट बुढा था | अत: जल्दी-जल्दी नहीं चल पा रहा था | रात को सौदागर एक छोटी सी सराय में रुका | रात में कुछ चौर उसके ऊँट लेकर चलते बने सुबह जब सौदागर को ऊँट नहीं दिखा तो […]

हेल्लो में अन्नू …?

हेल्लो- आफिस जाने के लिये घर से निकलने को ही था कि अचानक टेलीफोन कि घंटी बज उठी |मैंने कहा हेल्लो कोन ? हल्लो…..अविनाश मैं अन्नु बोल रही हूँ |अविनाश तुम घर कब आ रहे हो, जल्दी आ जाओ ना, देखो तुम अगर जल्दी नहीं आये तो……उधर से कुछ आवाज आती इससे पूर्व में ही […]

बगीचे का काम

बगीचे का काम एक छोटा बच्चा एक बड़ी दुकान पर लगे टेलीफोन बूथ पर जाता हैं और मालिक से छुट्टे पैसे लेकर एक नंबर डायल करता हैं। दुकान का मालिक उस लड़के को ध्यान से देखते हुए उसकी बातचीत पर ध्यान देता हैं – लड़का  – मैडम क्या आप मुझे अपने बगीचे  की साफ़ सफाई का […]

साकारात्मक हार

हिंदी कहानियाँ साकारात्मक हार गोपालदास जी के एक पुत्र और एक पुत्री थे। उन्हे अपने पुत्र के विवाह के लिये संस्कारशील पुत्रवधु की तलाश थी। किसी मित्र ने सुझाया कि पास के गांव में ही स्वरूपदास जी के एक सुन्दर सुशील कन्या है। गोपालदास जी किसी कार्य के बहाने स्वरूपदास जी के घर पहूंच गये, कन्या […]

बीता हुआ कल

हिंदी कहानियाँ बीता हुआ कल बुद्ध भगवान एक गाँव में उपदेश दे रहे थे. उन्होंने कहा कि “हर किसी को धरती माता की तरह सहनशील तथा क्षमाशील होना चाहिए. क्रोध ऐसी आग है जिसमें क्रोध करनेवाला दूसरोँ को जलाएगा तथा खुद भी जल जाएगा.” सभा में सभी शान्ति से बुद्ध की वाणी सून रहे थे, लेकिन […]